August 2009

Phool Bane Angaare

गीत: वतन पे जो फ़िदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा | Watan Pe Jo Fida Hoga, Amar Wo Naujawaan Hoga
फ़िल्म: फूल बने अंगारे (1963) | Phool Bane Angaare
संगीतकार: कल्याणजी-आनंदजी | Kalyanji-Anandji
फ़िल्मांकन: माला सिन्हा, राजकुमार | Mala Sinha, Rajkumar
गीतकार: आनंद बक्षी । Anand Bakshi
स्वर: मो. रफ़ी | Md Rafi



गीत के बोल:
हिमाला की बुलन्दी से, सुनो आवाज़ है आयी
कहो माँओं से दें बेटे, कहो बहनों से दें भाई

वतन पे जो फ़िदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा
रहेगी जब तलक दुनिया, यह अफ़साना बयाँ होगा
वतन पे जो फ़िदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा

हिमाला कह रहा है इस वतन के नौजवानों से
खड़ा हूँ संतरी बनके मैं सरहद पे ज़मानों से
भला इस वक़्त देखूँ कौन मेरा पासबाँ होगा
वतन पे जो फ़िदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा

चमन वालों की ग़ैरत को है सैय्यादों ने ललकारा
उठो हर फूल से कह दो कि बन जाये वो अंगारा
नहीं तो दोस्तों रुसवा, हमारा गुलसिताँ होगा

वतन पे जो फ़िदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा
वतन पे जो फ़िदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा
रहेगी जब तलक दुनिया, यह अफ़साना बयाँ होगा
वतन पे जो फ़िदा होगा अमर वो नौजवाँ होगा

हमारे एक पड़ोसी ने, हमारे घर को लूटा है
हमारे एक पड़ोसी ने, हमारे घर को लूटा है
भरम इक दोस्त की बस दोस्ती का ऐसे टूटा है
कि अब हर दोस्त पे दुनिया को दुश्मन का गुमाँ होगा
वतन पे जो फ़िदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा

सिपाही देते हैं आवाज़, माताओं को, बहनों को
हमें हथियार ले दो, बेच डालो अपने गहनों को
कि इस क़ुर्बानी पे क़ुर्बां वतन का हर जवाँ होगा

वतन पे जो फ़िदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा
रहेगी जब तलक दुनिया, यह अफ़साना बयाँ होगा
वतन पे जो फ़िदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा
6

गीत: भोर भये पनघट पे मोहे नटखट श्याम सताये | Bhor bhaye panghat pe mohe natkhat shyam sataye
फ़िल्म: सत्यम् शिवम् सुन्दरम् (1978)| Satyam Shivam Sundaram
गीतकार: आनन्द बक्षी | Anand Bakhsi
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल | Laxmikant-Pyarelal
स्वर: लता मंगेश्कर | Lata Mangeshkar

Satyam Shivam Sundaram 1978



गीत के बोल:


खिले है आशा के फूल मन में
यह राज़ हमने छुपाया हमने
क़दम मुबारक़ हमारे दर पे
नसीब हमने जगाया हमने

होऽ -२ आऽऽऽऽऽ
होऽ होऽ...
भोर भये पनघट पे मोहे नटखट श्याम सताये
मोरी चुनरिया लिपटी जाये
मैं का करूँ हाय राम हाय
भोर भये पनघट पे

कोई सखी सहेली नाहीं संग मैं अकेली
कोई देखे तो ये जाने
पनिया भरने के बहाने
गगरी उठाये राधा श्याम से
हाय-हाय श्याम से मिलने जाये हाय
भोर भये पनघट पे मोहे नटखट श्याम सताये
भोर भये पनघट पे

आये पवन झकोरा टूटे अंग-अंग मोरा
चोरी-चोरी चुपके-चुपके
बैठा कहीं पे वो छुपके
देखे मुस्काये निरलज को
निरलज को लाज न आये हाय
भोर भये पनघट पे मोहे नटखट श्याम सताये
भोर भये पनघट पे

मैं न मिलूँ डगर में तो वोह चला आये घर में
मैं दूँ गाली मैं दूँ झिड़की
मैं ना खोलूँ बंद खिड़की
निंदिया जो आये तो वो कंकर
हाय-हाय कंकर मार जगाये हाय
भोर भये पनघट पे मोहे नटखट श्याम सताये
मोरी चुनरिया लिपटी जाये
मैं का करूँ हाय राम हाय हाय
भोर भये पनघट पे
3

Editor

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget