May 2014

Kachche Dhaage - Khali Dil Nahi Jan Vi Hai Mangda


इश्क़ है पानी का इक क़तरा
क़तरे में तूफ़ान
एक हाथ में अपना दिल रख ले
एक हाथ में रख ले जान

ख़ाली दिल नहीं ये जाँ वी है मंगदा
ख़ाली दिल नहीं ये जाँ वी है मंगदा
इश्क़ की गली विच कोई-कोई लंगदा
इश्क़ की गली विच कोई-कोई लंगदा

ख़ाली दिल नहीं जाँ भी है मंगदा
ख़ाली दिल नहीं जाँ भी है मंगदा
इश्क़ की गली विच कोई-कोई लंगदा
इश्क़ की गली विच कोई-कोई लंगदा...

जोगियों के पीछे जैसे जोग लग जाता है,
प्रेमियों को प्रेम वाला रोग लग जाता है
लाख बचायें दामन लोग लग जाता है,
दिल पे आशिकों के निशान इस रंगदा

इश्क़ की गली विच कोई-कोई लंगदा,
इश्क़ की गली विच कोई-कोई लंगदा...

दुश्मन है दिल का ऐसा मन का यह मीत है
जग से निराली इस खेल की रीत है
जीत में हार है, हार में जीत है
इश्क़ इश्क़ है, मैदान नहीं जंग दा

इश्क़ की गली विच कोई-कोई लंगदा
इश्क़ की गली विच कोई-कोई लंगदा...

नाम है दीवाना दूजा न नाम कोई,
प्यार के जैसा बदनाम नहीं कोई
इश्क़ से बड़ा इल्ज़ाम नहीं कोई,
इश्क़ आशिकानूँ सूलियों उते टंगदा

इश्क़ की गली विच कोई-कोई लंगदा,
इश्क़ की गली विच कोई-कोई लंगदा...

ख़ाली दिल नहीं जाँ भी है मंगदा
ख़ाली दिल नहीं जाँ भी है मंगदा
इश्क़ की गली विच कोई-कोई लंगदा
इश्क़ की गली विच कोई-कोई लंगदा

गीत: ख़ाली दिल नहीं जाँ वी है मंदगा | Khali Dil Nahin Jaan Vi Hai Mangda
फ़िल्म: कच्चे धागे (1998) | Kachche Dhaage
संगीतकार: नुसरत फ़तेह अली ख़ान | Nusarat Fateh Ali Khan
स्वर: अल्का याग्निक, हंस राज हंस और साथी | Alka Yagnik, Hans Raj Has & Chorus

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हीरो(1983) फ़िल्म से यह गीत तो आप सबको याद होगा, यह गीत आनन्द साहब ने लिखा दर्द बयाँ करने में आज तक इस गीत के जैसा गीत कोई दूसरा नहीं जो हर स्तर के मन: स्थिति को आसानी से समझ आ जाता हो, आनन्द साहब की कलम से जब दर्द भरे हर्फ़ उतरे, दिल की गहराई में छुपे दर्द की परतों को उकरेने लगे... सलाम आनन्द साहब

गीत: बड़ी लम्बी जुदाई । Badi Lambi Judaai
स्वर: रेशमा | Reshma
गीतकार: आंनद बक्षी | Anand Bakshi
फ़िल्म: हीरो (1983) । Hero 1983 Film
संगीत: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल | Laxmikant-Pyarelal



Hero 1983 Film Subhash Ghai

गीत के बोल:

बिछड़े अभी तो हम
बस कल परसों
जियूंगी मैं कैसे
इस हाल में बरसों
मौत ना आये तेरी याद क्यों आये?
हाय, लम्बी जुदाई

चार दिनों का प्यार, हो रब्बा
बड़ी लम्बी जुदाई, लम्बी जुदाई
होंठों पे आये, मेरी जान, दुहाई
हाय, लम्बी जुदाई
चार दिनों का प्यार, हो रब्बा
बड़ी लम्बी जुदाई, लम्बी जुदाई

एक तो सजन मेरे पास नहीं रे
दूजे मिलन दी कोई आस नहीं रे - २
उसपे ये सावन आया - २
आग लगाने
हाय, लम्बी जुदाई
चार दिनों का प्यार, हो रब्बा
बड़ी लम्बी जुदाई, लम्बी जुदाई

बाग उजड़ गये, बाग उजड़ गये खिलने से पहले
पंछी बिछड़ गये मिलने से पहले - २
कोयल की कूक, कोयल की कूक ने हूक उठायी
हाय, लम्बी जुदाई
चार दिनों का प्यार, हो रब्बा
बड़ी लम्बी जुदाई, लम्बी जुदाई
होंठों पे आये, मेरी जान, दुहाई
हाय, लम्बी जुदाई

टूटे ज़माने तेरे हाथ निगोड़े, हाथ निगोड़े
दिल से दिलों की तूने शीशे तोड़े, शीशे तोड़े
हिज्र की ऊँची, हिज्र की ऊँची दीवार बनायी
हाय, लम्बी जुदाई
चार दिनों का प्यार, हो रब्बा
बड़ी लम्बी जुदाई, लम्बी जुदाई

चार दिनों का प्यार, हो रब्बा
बड़ी लम्बी जुदाई
लम्बी जुदाई, लम्बी जुदाई
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इस गीत के क्या कहने, कौन होगा जो ऐसे उम्दा गीत को पसंद नहीं करता या सुनने के बाद पसंद न करे। बस अचरज इतना है कि इसके संगीतकार अनु मलिक है। यह वही गीत है जो यह साबित करता है आनन्द बक्षी से जैसा चाहे वैसा लिखवा लो, उन्हें गीत में शब्द को शहद बनाना आता है...

गीत: चमकते चाँद को टूटा हुआ तारा बना डाला | Chamakte Chand Ko Toota Hua Tara Bana Dala
चित्रपट: आवारगी (१९९०) | Awaaragi 1990
संगीत: अनु मलिक | Anu Malik
गीतकार: आनंद बक्षी | Anand Bakshi
स्वर: ग़ुलाम अली | Ghulam Ali

Awaaragi 1990




गीत के बोल:

चमकते चाँद को टूटा हुआ तारा बना डाला
मेरी आवारगी ने मुझको आवारा बना डाला

बड़ा दिलकश बड़ा रंगीन है यह शहर कहते हैं
यहाँ पर हैं हज़ारों घर घरों में लोग रहते हैं
मुझे इस शहर ने गलियों का बंजारा बना डाला
चमकते चाँद को...

मैं इस दुनिया को अक़्सर देखकर हैरान होता हूँ
न मुझसे बन सका छोटा-सा घर दिन-रात रोता हूँ
ख़ुदाया तूने यह कैसे सारा जहाँ बना डाला
चमकते चाँद को...
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आइए दोस्तों शुरुआत करते हैं उस गीत से जिसके लिए आनन्द बक्षी साहब ने पहला फ़िल्म-फेयर पुरस्कार जीता। मुझे तो यह गीत बचपन से ही बहुत है, आपको भी ज़रूर पसंद होगा। अगर पहले नहीं सुना तो आज सुनिये और अपनी राय दें।

गीत : आदमी मुसाफ़िर है । Adami Musafir Hai
गायक : लता और मुहम्मद रफ़ी | Lata Aur Md Rafi
संगीतकार : लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल | Laxmikant-Pyarelal
चित्रपट : अपनापन (१९७७) | Apnapan (1977)
गीतकार : आनंद बक्षी | Anand Bakshi



गीत के बोल:

आदमी मुसाफ़िर है आता है जाता है
आते-जाते रस्ते में यादें छोड़ जाता है

झोंका हवा का पानी का रेला -२
मेले में रह जाए जो अकेला -२
वो फिर अकेला ही रह जाता है
आदमी मुसाफ़िर है ...

क्या साथ लाए क्या छोड़ आए
रस्ते में हम क्या छोड़ आए
मंज़िल पे जा के ही याद आता है
आदमी मुसाफ़िर है ...

जब डोलती है जीवन की नैया
कोई तो बन जाता है खिवैया
कोई किनारे पे ही डूब जाता है
आदमी मुसाफ़िर है ...

रोती है आँख जलता है ये दिल
जब अपने घर के फेंके दिये से
आँगन पराया जगमगाता है
आदमी मुसाफ़िर है ...

Apnapan 1977

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