August 2015

होली का जिधर देखो माहौल बना हुआ है, रंग है गुलाल है, छोरे का, गोरी का तन लाल है। ऐसा समा बंधा है कि बस आनन्द साहब और राहुल देव का यह गाना ख़ुद ही याद आ रहा है और गाये जा रहा हूँ। आप गाओ और रंग उड़ाओ कि बच न जाने पाये कोई, होली है!!!



गीत: आज न छोड़ेंगे बस हमजोली, खेलेंगे हम होली | Aaj Na Chhorenge Bas Hamjoli, Khelenge Ham Holi
फ़िल्म: कटी पतंग (1970) | Kati Patang
संगीतकार: राहुल देव बर्मन | RD Burman
स्वर: लता मंगेश्कर, किशोर कुमार | Lata Mangeshkar, Kishor Kumar

गीत के बोल:

हे.. आज न छोड़ेंगे
हाँ.. आज न छोड़ेंगे बस हमजोली
(खेलेंगे हम होली) - 2
चाहे भीगे.. चाहे भीगे तेरी चुनरिया
चाहे भीगे रे चोली
खेलेंगे हम होली
होली है

अपनी अपनी किस्मत है ये
(कोई हँसे कोई रोये) - 2
हो.. रंग से कोई अंग भिगोये रे कोई
(असुवन से नैन भिगोये) - 2

हुर्र र र र
रहने दो ये बहाना
क्या करेगा ज़माना
हो.. तुम हो कितनी भोली
हो.. खेलेंगे हम होली

ऐसे तोड़ गए हैं
(मुझसे ये सुख सारे) - 2
हो.. जैसे जलती आग किसी वन में
(छोड़ गए बंजारे) - 2

हुर्र र र र
दुःख है इक चिंगारी
भर के ये पिचकारी
हो.. आयी मस्तों की टोली
हो.. खेलेंगे हम होली
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आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ, पेश है शोले फ़िल्म से होली का यह गीत, रंग खेलिए, हुल्लड़ माचिए, पापड़ खाइए और क्या, होली है!!!



गीत: होली के दिन दिल खिल जाते हैं | Holi Ke Din Khil Jate Hain
फ़िल्म: शोले (1975) | Sholey
संगीतकार: राहुल देव बर्मन | RD Burman
स्वर: लता मंगेश्कर, किशोर कुमार | Lata Mangeshkar, Kishor Kumar
गीत के बोल:

चलो सहेली
चलो रे साथी
ओ पकड़ो-पकड़ो
रे इसे न छोड़ो
अरे बैंया न मोड़ो
ज़रा ठहर जा भाभी
जा रे सराबी
क्या हो राजा
गली में आजा
होली रे होली
भंग की गोली
ओ नखरे वाली
दूँगी मैं गाली
ओ राअमू की साली
होली रे होली

होली के दिन दिल खिल जाते हैं रंगों में रंग मिल जाते हैं
गिले शिक़वे भूल के दोस्तो दुश्मन भी गले मिल जाते हैं

गोरी तेरे रंग जैसा थोड़ा सा रंग मिला लूँ
आ तेरे गुलाबी गालों से थोड़ा सा गुलाल चुरा लूँ
जा रे जा दीवाने तू होली के बहाने तू छेड़ न मुझे बेशरम
पूच ले ज़माने से ऐसे ही बहाने से लिए और दिए दिल जाते हैं
होली के दिन दिल ...

यही तेरी मरज़ी है तो अच्छा तू ख़ुश हो ले
पास आ के छूना ना मुझे चाहे दूर से भिगो ले
हीरे की कनी है तू मोती की बनी है तू छूने से टूट जाएगी
काँटों के छूने से फूलों से नाज़ुक-नाज़ुक बदन छिल जाते हैं
होली के दिन दिल ...
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आदमी मुसाफ़िर के बाद यह वह दूसरा गीत रहा जिसने आनन्द साहब की शोहरत में चार चाँद लगा दिये और उन्होंने दूसरी बार फ़िल्मफ़ेयर (filmfare) पुरस्कार जीत लिया। इतना ख़ूबसूरत प्रेम गीत है कि जब सुनिए दिल का रोम-रोम महक उठता है।



गीत: एक-दूजे के लिए । Ek Duuje Ke Liye
फ़िल्म: एक-दूजे के लिए (1981) | Ek Duuje Ke Liye
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल | Laxmikant Pyarelal
स्वर: लता मंगेश्कर, एस पी बालासुब्राह्मण्यम | Lata Mangeshkar

गीत के बोल:

लता: ओ, तेरे मेरे बीच में -२
कैसा है यह बन्धन अंजाना -३
मैंने नहीं जाना, तूने नहीं जाना -२
तेरे मेरे बीच में ...
एक डोर खींचे दूजा दौड़ा चला आए -२
कच्चे धागे में बंधा चला आए ऐसे जैसे कोई ...
ऐसे जैसे कोई, दीवाना -२
मैंने नहीं जाना,
तूने नहीं जाना तेरे मेरे बीच में ...

एस. पी. बालासुब्रामण्यम: हो हो आपड़िया

लता:
हा हा जैसे सब समझ गया
पहनूँगी मैं तेरे हाथों से कंगना -२
जाएगी मेरी डोली तेरे ही अंगना चाहे कुछ कर ले ...
चाहे कुछ कर ले, ज़माना -२
मैंने नहीं जाना, तूने नहीं जाना तेरे मेरे बीच में ...

एस. पी. बालासुब्रामण्यम:
नी रुम्बा अड़गा इरुक्के

लता:
रुम्बा? ये रुम्बा-रुम्बा क्या है?
इतनी ज़ुबानें बोलें लोग हमजोली -२
दुनिया में प्यार की एक है बोली
बोले जो शमा ... बोले जो शमा, परवाना -२
मैंने नहीं जाना, तूने नहीं जाना

एस. पी. बालासुब्रामण्यम:
परवा इल्लये नल्ला पादरा

लता: क्या?
कैसा है यह बन्धन अंजाना मैंने नहीं जाना, तूने नहीं जाना
तेरे मेरे बीच में ...

Slow Version...
तेरे मेरे बीच में कैसा है ये बन्धन अन्जाना
मैं ने नहीं जाना, तू ने नहीं जाना

एक डोर खींचे दूजा दौड़ा चला आए -२
कच्चे धागे में बंधा चला आए
ऐसे जैसे कोई ...
ऐसे जैसे कोई, दीवाना -२
मैंने नहीं जाना, तूने नहीं जाना
तेरे मेरे बीच में ...

नींद न आये मुझे चैन न आये
लाख जतन कर रोक न पाये
सपनों में तेरा
ओ, सप्नों में तेरा आना जाना
मैं ने नहीं जाना, तू ने नहीं जाना
तेरे मेरे बीच में ...
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बहुत सरल-सा गीत है जिसे मो. रफ़ी ने गाया है जो किसी को एहसास दिलाता है कि प्यार की मुश्किलें सब आसान हो जायेंगी और आपकी प्रेमिका जो छुपने का झूठा नाटक कर रही है उसे आपके प्रेम की ख़ातिर वह ख़त्म ही करना पड़ेगा। बहुत कर्णप्रिय गीत-संगीत है आप भी सुनिए!



स्वर: मोहम्मद रफ़ी । Mohd. Rafi
गीतकार: आनन्द बक्षी | Anand Bakshi
फ़िल्म: मैं तुलसी तेरे आँगन की (1978) | Main Tulsi Tere Angan Ki (1978)
संगीत: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल | Laxmikant-Pyarelal

गीत के बोल:

मेरी दुश्मन है ये मेरी उलझन है ये
बड़ा तड़पाती है दिल को तरसाती है
ये खिड़की
ये खिड़की
जो बन्द रहती है
जो बन्द रहती है
मेरी दुश्मन है ये …

लगता है मेला न जाने कहाँ
आशिक़ जमा होते हैं जहाँ
अरे सबको पता है ये दास्ताँ
इस घर में है एक लड़की जवाँ
आँखें झुका के गुज़रो इस गली से
आने-जाने वालों से कहती है
ये खिड़की जो बन्द …

ग़म की घटा है ये छट जाएगी
आहों से दीवार फट जाएगी
जब सामने से ये हट जाएगी
घूँघट में गोरी सिमट जाएगी
इक रोज़ गिर जाएगी टूट के ये
कितने नज़रों के तीर सहती है
ये खिड़की जो बन्द …

आए कभी चौबारे पे वो
कुछ सोचे मेरे बारे में वो
अरे बातें करे दो इशारे में वो
चुप सी खड़ी है उस किनारे पे वो
उस पार वो है और इस पार मैं हूँ
नदिया बीच में बहती है
ये खिड़की जो बन्द …

Roman Hindi Lyrics -
Meri dushman hai yeh meri uljhan hai yeh
Bada tadapati hai dil tarsati hai yeh khidki
Khidki yeh khidki, yeh khidki jo bandh raheti hai
Yeh khidki jo bandh raheti hai

Meri dushman hai yeh meri uljhan hai yeh
Bada tadapati hai dil tarsati hai yeh khidki
Khidki yeh khidki, yeh khidki jo bandh raheti hai
Yeh khidki jo bandh raheti hai

Lagta hai mela na jaane kahan
Ashiq jama hotey hai yahan
Arey sabko pata hai yeh dastaan
Is ghar me hai ek ladki jawan
Ankhen jhuka ke guzro is gali se
Aane jaanewalon se kaheti hai
Yeh khidki jo bandh raheti hai
Yeh khidki jo bandh raheti hai

Gham ki ghata hai ye chhat jayengi
Baaho se deewar pahat jayengi
Jab samne se ye hat jayengi
Ghunghat main gori simat jayengi
Ik roj khul jayengi tut ke ye kitani
Nazro ke tir sehati hai
Yeh khidki jo bandh raheti hai
Yeh khidki jo bandh raheti hai

Aaye kabhi chaubharey main woh
Kuch sochey mere bharey main owh
Arey baaten karen jo ishare me woh
Baithi kadi chaubarey main woh
Us paar woh hai aur is paar main
Nadiya beech main baheti hai
Yeh khidki jo bandh raheti hai.
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यह गीत और यह फ़िल्म साल के सबसे बड़े हिट थे और सबने इनको सराहा। आज फिर इस गीत की याद आ गयी तो पेश कर रहा हूँ। आपकी टिप्पणी का इंतज़ार है।



गीत: मैं तुलसी तेरे आंगन की । Main Tulsi Tere Angan Ki
स्वर: लता मंगेश्कर | Lata Manageshkar
गीतकार: आनन्द बक्षी | Anand Bakshi
फ़िल्म: मैं तुलसी तेरे आँगन की (1978) | Main Tulsi Tere Angan Ki
संगीत: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल | Laxmikant Pyarelal

गीत के बोल:

मैं तुलसी तेरे आँगन की
कोई नहीं मैं
कोई नहीं मैं तेरे साजन की
मैं तुलसी तेरे आँगन की

माँग भी तेरी, सिंदूर भी तेरा
सब कुछ तेरा, कुछ नहीं मेरा
तोहे सौगन्ध तेरे (मेरे) अँसुअन की
मैं तुलसी तेरे आँगन की

काहे को तू मुझसे जलती है
ऐ री मोहे तो तू लगती है
कोई सहेली बचपन की
मैं तुलसी तेरे आँगन क

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शब्दार्थ/Word-Meaning:
तुलसी: Basil; आँगन: Lawn; साजन: Lover, Husband; सौंगंध: Affirmation; अँसुअन: Tears; सहेली: Female friend; बचपन: Childhood
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प्रेम दिवस की हार्दिक बधाई। विरोधियों का मुँहतोड़ जवाब यह गीत सुनिये। जो विरोध करते हैं उनके दिल की कालख भी धुल जायेगी। मूर्खता, द्वेष और ईर्ष्या से ऊपर उठो, सबसे प्यार करो!



गीत: सोलह बरस की बाली उमर को सलाम | Solah Baras Ki Baali Umar Ko Salaam
फ़िल्म: एक-दूजे के लिए (1981) | Ek Duuje Ke Liye
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल | Laxmikant Pyarelal
स्वर: लता मंगेश्कर, अनूप जलोटा | Lata Mangeshkar, Anoop Jalota

गीत के बोल
कोशिश कर के देख ले दरिया सारे नदिया सारी
दिल की लगी नहीं बुझती, बुझती है हर चिंगारी

सोलह बरस की बाली उमर को सलाम
ऐ प्यार! तेरी पहली नज़र को सलाम...

दुनिया में सबसे पहले जिसने ये दिल दिया
दुनिया के सबसे पहले दिलबर को सलाम
दिल से निकलने वाले रस्ते का शुक्रिया
दिल तक पहुँचने वाली डगर को सलाम
ऐ प्यार! तेरी पहली नज़र को सलाम...

जिस में जवान हो कर, बदनाम हम हुए
उस शहर, उस गली, उस घर को सलाम
जिसने हमें मिलाया, जिसने जुदा किया
उस वक़्त, उस घड़ी, उस डगर को सलाम
ऐ प्यार! तेरी पहली नज़र को सलाम ...

मिलते रहे यहाँ हम, ये है यहाँ लिखा
उस लिखावट की ज़ेरो-ज़बर को सलाम
साहिल की रेत पर यूँ लहरा उठा ये दिल
सागर में उठने वाली हर लहर को सलाम
यूँ मस्त गहरी-गहरी आँखों की झील में
जिसने हमें डुबोया उस भँवर को सलाम
घूँघट को छोड़कर जो सर से सरक गयी
ऐसी निगोड़ी धानी चुनर को सलाम
उल्फ़त के दुश्मनों ने कोशिश हज़ार की
फिर भी नहीं झुकी जो, उस नज़र को सलाम

ऐ प्यार! तेरी पहली नज़र को सलाम ..
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वेलेटाईन डे आ रहा है कोई न कोई कुछ न कुछ कर रहा है। कुछ विरोध कर रहे हैं और कुछ पक्ष में बोल रहे हैं। लेकिन प्यार में पड़ने वालों पर इस बात का कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।, क्योंकि प्यार ऐसी ही चीज़ है। सदैव याद रखें प्यार प्यार ही है वह आपको चाहे जिस रूप में मिले। प्यार के दिन पर विशेष गीत, इस गीत की तारीफ़ करना यानी सूरज को दिया दिखाने जैसी बात है।



गीत: छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलायके । Chhap Tilak Sab Chhini Re Mose Naina Milaike
स्वर: आशा भोंसले, लता | Asha Bhonsle, Lata Mangeshkar
गीतकार: आनन्द बक्षी | Anand Bakshi
फ़िल्म: मैं तुलसी तेरे आँगन की (1978) | Main Tulsi Tere Aagan Ki
संगीत: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल | Laxmikant Pyarelal

गीत के बोल:

लता: अपनी छब बनायके
जो मैं पी के पास गयी
आशा: अपनी छब बनायके
जो मैं पी के पास गयी
दोनों: जब छब देखी पीहू की
सो मैं अपनी भूल गयी

ओ, (छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलायके) -२
छाप तिलक

लता: सब छीनी रे मोसे नैना
नैना, मोसे नैना
नैना रे, मोसे नैना मिलायके
नैना मिलायके

दोनों: छाप तिलक सब छीनी रे मोसे

आशा: नैना, (नैना मिलायके) -२

दोनों: छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलायके

लता: ए री सखी
(मैं तोसे कहूँ) -२
हाय तोसे कहूँ
मैं जो गयी थी
(पनिया भरन को) -३
छीन झपट मोरी मटकी पटकी
छीन झपट मोरी झपट मोरी मटकी पटकी
नैना मिलायके

दोनों: छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलायके

आशा: (बल-बल जाऊँ मैं) -२
(तोरे रंग रजेवा) -२
(बल-बल जाऊँ मैं) -२
(तोरे रंग रजेवा) -३
(अपनी-सी) -३
रंग लीनी रे मोसे
नैना मिलायके

दोनों: छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलायके

आशा: ए री सखी
(मैं तोसे कहूँ) -२
हाय तोसे कहूँ

लता: (हरी हरी चूड़ियाँ) -२
(गोरी गोरी बहियाँ) -२
हरी हरी चूड़ियाँ
(गोरी गोरी बहियाँ) -३
(बहियाँ पकड़ हर लीनी) -२
रे मोसे नैना मिलायके

दोनों: छाप तिलक सब छीनी रे मोसे

आशा: नैना
(नैना मिलायके) -३

दोनों: छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलायके
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गीत: प्यार करने वाले कभी डरते नहीं । Pyar Karne Wale Kabhi Darte Nahin
स्वर: लता मंगेश्कर और मनहर उधास । Lata Mangeshkar, Manhar Udhas
गीतकार: आनन्द बक्षी । Anand Bakshi
फ़िल्म: हीरो (1983) । Hero
संगीत: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल । Laxmikant Pyarelal
कलाकार: जैकी श्राफ़, मीनाक्षी सेशाद्री । Jackie Shroff & Meenakshi Seshadri



गीत के बोल -
लोगों से सुना है किताबों में लिखा है
सब ने यही कहा है सब ने यही कहा है
प्यार करने वाले कभी डरते नहीं
जो डरते हैं वो प्यार करते नहीं

लम्बी दीवारें चुनवा दो लाख बिठा दो पहरे
रस्ते में बिछा दो ऊँचे पर्वत सागर गहरे
तूफ़ाँ कब रुकते हैं बादल जब झुकते हैं
तारे कह उठते हैं सारे कह उठते हैं
प्यार करने वाले कभी डरते नहीं ...

प्यार छुपे न खुशबू ये एलान कहो तो कर दूँ
चुटकी भर सिन्दूर मँगा दे माँग में तेरी भर दूँ
दुनिया क्या कर लेगी दुनिया से कहेगी
बस कहती ही रहेगी, बस कहती ही रहेगी
प्यार करने वाले कभी डरते नहीं ...

Roman Hindi -
logo.n se sunaa hai kitaabo.n me.n likhaa hai
sab ne yahii kahaa hai sab ne yahii kahaa hai
pyaar karane vaale kabhii Darate nahii.n
jo Darate hai.n vo pyaar karate nahii.n

lambii diivaare.n chunavaa do laakh biThaa do pahare
raste me.n bichhaa do uu.Nche parvat saagar gahare
tuufaa.N kab rukate hai.n baadal jab jhukate hai.n
taare kah uThate hai.n saare kah uThate hai.n
pyaar karane vaale kabhii Darate nahii.n ...

pyaar chhupe na khushabuu ye elaan kaho to kar duu.N
chuTakii bhar sinduur ma.Ngaa de maa.Ng mae.n terii bhar duu.N
duniyaa kyaa kar legii duniyaa se kahegii
bas kahatii hii rahegii, bas kahatii hii rahegii
pyaar karane vaale kabhii Darate nahii.n ...
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'तू मेरा हीरो है' सुभाष घई की सबसे बड़ी हिट फ़िल्म हीरो का यह गीत हर प्रेमी के दिल की आवाज़ है! जो कभी प्यार में और हालातों से मायूस हुआ उसे गीत ज़रूर याद आया। आनन्द बक्षी ने जो बोल इस गीत में लिखे वह सरल हैं किन्तु दिल पर उनका प्रभाव पड़ता है। सरल शब्दों में बड़ी बात कहने का हुनर उन्हें आता था। एक और रोचक बात जब यह गीत रिलीज़ हुआ तो अनुराधा पौडवाल की आवाज़ बहुत सराही गयी और उन्हें वह गीत भी दूसरी फ़िल्मों में गाने को मिले जो लता मंगेश्कर को दिये जाने थे।

गीत: तू मेरा जानू । Tu Mera Jaanu Hai
स्वर: अनुराधा पौडवाल और मनहर उधास । Anuradha Paudwal & Manhar Udhas
गीतकार: आनन्द बक्षी । Anand Bakshi
फ़िल्म: हीरो (1983) । Hero
संगीत: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल । Laxmikant Pyarelal
कलाकार: जैकी श्राफ़, मीनाक्षी सेशाद्रीJackie Shroff & Meenakshi Seshadri




गीत के बोल:
मेरा बालाम मेरा साजन मेरा साजन मेरा बालाम
मेरा मजनू मेरा राँझा
जानू!

तू मेरा जानू है तू मेरा दिलबर है
मेरी प्रेम कहानी का तू हीरो है
पर प्रेम ग्रन्थ के पन्नों पर
अपनी तक़दीर तो ज़ीरो है

दिल वालों में न कोई अमीर होता है न गरीब होता है
किसी किसी को ये प्यार नसीब होता है
दिल की दुनिया से ये दुनिया दूर होती है दिल क़रीब होता है
कोई कोई ऐसा खुशनसीब होता है
तेरी बातें तू ही जाने मैं तो बस इतना जानूँ
जानू! जानू! जानू!
तू मेरा जानू है ...

प्रेमी के हाथों में प्रेम लकीर होती है, तहरीर होती है
नहीं नहीं आँखों में तसवीर होती है
प्यार जो करते हैं उनकी तक़दीर होती है, जागीर होती है
कुछ भी हो लेकिन राँझे की ही हीर होती है
ये सब किस्से हैं पुराने मैं तो बस इतना जानूँ
कि प्रेम ग्रन्थ के पन्नों पर अपनी तक़दीर तो ज़ीरो है
कि प्रेम ग्रन्थ के पन्नों पर तू मेरा हीरो है

कितना पापी है तू मुझे प्यार करता है, इक़रार करता है
याद तुझे पल में दिल सौ बार करता है
देखें कौन जुदा हमको दिलदार करता है इंकार करता है
प्यार कहाँ लोगों का इंतज़ार करता है
तेरी बातें तू ही जाने मैं तो बस इतना जानूँ
जानू जानू जानू जानू जानू जानू
मैं तेरा जानूँ हूँ ...
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यह गीत जब भी सुनता हूँ इसका असर रूह तक होता है। ग़ुम हो जाता हूँ बीते हुए पलों में और इसका लुत्फ़ धीरे-धीरे मुझे जज़्ब कर लेता है। जैसे आनन्द साहब ने इस गीत के शब्दों को दर्द का सानी बना दिया है। सुनिए और अपनी यादों में सराबोर हो जाइए।

गीत: और क्या अहदे-वफ़ा होते हैं । Aur kya Ehd-e-wafa hote hain
स्वर: आशा भोंसले | Asha Bhosle
गीतकार: आनन्द बक्षी | Anand Bakshi
फ़िल्म: सनी (1984) | Sunny
संगीत: राहुल देव बर्मन | RD Burman

Part 1



Part 2



गीत के बोल:
और क्या अहदे-वफा होते हैं
लोग मिलते हैं जुदा होते हैं

मोहब्बत करने वाले कम नहीं हैं
तेरी महफ़िल में मगर हम नहीं हैं

कब बिछड़ जाये हमसफर ही तो है
कब बदल जाये इक नज़र ही तो है
जानो-दिल जिस पे फ़िदा होते हैं
और क्या अहदे-वफ़ा होते हैं...

हम तो दो बोल कह के हारे हैं
तुम हमारे हम तुम्हारे हैं

बात निकली थी इस ज़माने की
जिसको आदत है भूल जाने की
आप क्यों हमसे खफ़ा होते हैं
और क्या अहदे वफ़ा होते हैं...

जब रुला लेते हैं जी भर के हमें
जब सता लेते हैं जी भर के हमें
तब कहीं खुश वो ज़रा होते हैं
और क्या अहदे-वफ़ा होते हैं...
5

वाह क्या गीत है, 'गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है'!!! ज़िन्दगी में सदा आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाले इस गीत में आनन्द साहब ने रेल का उदाहरण लेकर ख़ूब कमाल कर दिखाया है! किशोर दा ने भी इतनी ख़ूबसूरती से गाया है इसे बार-बार सुनने को दिल करता है! लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जो इंडस्ट्री में हिट गीतों देने वाली मशीन माने जाते रहे हैं, उनका बुना यह एक नायाब गीत है। सुनिए और बताइए यह आपको कैसा लगा?

यह गीत फ़िल्म में दो भागों में है इसलिए पहला और दूसरा दोनों दे रहा हूँ, गीत कुछ बड़ा है इसलिए इसका आडियो रूप भी दे रहा हूँ, अपने श्रोताओं का ख़्याल तो रखना ही पड़ता है!

गीत का पहला भाग:



गीत का दूसरा भाग:




गीत: गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है | Gaadi bula rehi hai, ceeti baza rahi hai
स्वर: किशोर कुमार | Kishor Kumar
गीतकार: आनन्द बक्षी | Anand Bakshi
फ़िल्म: दोस्त (1974) | Dost
संगीत: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल | Laxmikant Pyarelal
कलाकार: धर्मेंद्र । Dharmendra


गीत के बोल:
गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है...
चलना ही ज़िंदगी है, चलती ही जा रही है

देखो वह रेल, बच्चों का खेल, सीखो सबक जवानों
सर पे है बोझ, सीने में आग, लब पे धुँआ है जानो
फिर भी ये गा रही है, नग़में सुना रही है...

आगे तूफ़ान, पीछे बरसात, ऊपर गगन पे बिजली
सोचे न बात, दिन हो के रात, सिगनल हुआ के निकली
देखो वो आ रही है, देखो वो जा रही है

आते हैं लोग, जाते हैं लोग, पानी के जैसे रेले
जाने के बाद, आते हैं याद, गुज़रे हुए वो मेले
यादें मिटा रही है, यादें बना रही है

गाड़ी को देख, कैसी है नेक, अच्छा बुरा न देखे
सब हैं सवार, दुश्मन के यार, सबको चली ये लेके
जीना सिखा रही है, मरना सिखा रही है

गाड़ी का नाम, ना कर बदनाम, पटरी पे रख के सर को
हिम्मत न हार, कर इंतज़ार, आ लौट जाएं घर को
ये रात जा रही है, वो सुबह आ रही है

सुन ये पैग़ाम, ये है संग्राम, जीवन नहीं है सपना
दरिया को फाँद, पर्वत को चीर, काम है ये उसका अपना
नींदें उड़ा रही है, जागो जगा रही है

फ़िल्म बेताब से मुझे यह गीत बहुत पसंद है मज़े की बात तो यह कि जो आडियो (HMV से) मेरे पास है उस पर गीतकार का नाम जावेद अख़्तर है, जबकि वास्तविकता में यह गीत आनन्द साहब ने लिखा है, आप चाहें तो फ़िल्म की स्टारिंग में देख सकते हैं।


स्वर: शब्बीर कुमार, लता मंगेश्कर | Shabbir Kumar, Lata Mangeshkar
गीतकार: आनन्द बक्षी | Anand Bakshi
फ़िल्म: बेताब (1983) | Betaab
संगीत: राहुल देव बर्मन | RD Burman



गीत के बोल:
जब हम जवाँ होंगे जाने कहाँ होंगे
लेकिन जहाँ होंगे वहाँ पर याद करेंगे
तुझे याद करेंगे ...

ये बचपन का प्यार अगर खो जायेगा
दिल कितना खाली-खाली हो जायेगा
तेरे ख़यालों से इसे आबाद करेंगे
तुझे याद करेंगे ...

ऐसे हँसती थी वो ऐसे चलती थी
चाँद के जैसे छुपती और निकलती थी
सब से तेरी बातें तेरे बाद करेंगे
तुझे याद करेंगे ...

तेरे शबनमी ख़्वाबों की तस्वीरों से
तेरी रेशमी ज़ुल्फ़ों की ज़ंजीरों से
कैसे हम अपने आप को आज़ाद करेंगे
तुझे याद करेंगे ...

ज़हर जुदाई का पीना पड़ जाये तो
बिछड़ के भी हम को जीना पड़ जाये तो
सारी जवानी बस यूँ ही बर्बाद करेंगे
तुझे याद करेंगे ...
7

ग़म का दिल पर घाव बहुत गहरा होता है, ख़ुशी तो कोई भूल भी जाये मगर ग़म के अंधेरे कोई नहीं भूल पाया, ऐसा ही इस गीत में आनंद साहब ने लिखा है, मैं तो रोता हूँ साथ सावन भी रोता है! और यही सच है।

गीत: तेरी याद आ रही है । Teri Yaad Aa Rahi Hai
स्वर: अमित कुमार, लता मंगेश्कर | Amit Kumar, Lata Manageshkar
गीतकार: आनंद बक्षी | Anand Bakshi
फ़िल्म: लव स्टोरी (1981) | Love Story
संगीत: राहुल देव बर्मन | Rahul Dev Burman



गीत के बोल:

याद आ रही है, तेरी याद आ रही है
याद आने से, तेरे जाने से, जान जा रही है

पहले ये न जाना, तेरे बाद ये जाना प्यार में
जीना मुश्किल कर देगा, ये दिल दीवाना प्यार में
जाने कैसे, साँस ये ऐसे, आ जा रही है
याद आ रही है ...

बनते बनते दुल्हन, प्रीत हमारी उलझन बन गई
मेरे दिल की धड़कन, मेरी जान की दुश्मन बन गई
कुछ कह कहके, मुझे रह रहके, तड़पा रही है
याद आ रही है ...

ये रुत की रंगरलियां, ये फूलों की गलियां रो पड़ीं
मेरा हाल सुना तो, मेरे साथ ये कलियां रो पड़ीं
एक नहीं तू, दुनिया आँसू, बरसा रही है
याद आ रही है ...
6

संसार की बातों को दिल से नहीं लगाना चाहिए और जो उचित है वही करना चाहिए यह सभी विद्वानों ने माना है क्योंकि यह सार्थक है। लेकिन जब बम्बई जगत में बनी किसी फ़िल्म में यह बात गीत के रूप में कही जा रही हो तो आनन्द बख्शी के इस गीत से बेहतर कोई दूसरा गीत मैंने नहीं पाया, आप भी सोचकर देंखे, नहीं पायेंगे! ऐसा गीत तो कोई लिख ही सकता आनन्द साहब ने जो लिखा किशोर दा ने उसे ख़ूब गाया, इस गीत का लुत्फ़ लें मैं कोई दूसरा नग़मा ढूँढ़ता हूँ...


स्वर: किशोर कुमार | Kishor Kumar
गीतकार: आनन्द बक्षी । Anand Bakshi
फ़िल्म: अमर प्रेम (1971) | Amar Prem
संगीत: आर. डी. बर्मन | R.D. Burman
कलाकार: राजेश खन्ना । Rajesh Khanna



गीत के बोल:

(कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना
छोड़ो बेकार की बातों में कहीं बीत ना जाए रैना ) - २
कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना

कुछ रीत जगत की ऐसी है, हर एक सुबह की शाम हुई - २
तू कौन है, तेरा नाम है क्या, सीता भी यहाँ बदनाम हुई
फिर क्यूँ संसार की बातों से, भीग गये तेरे नैना
कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना
छोड़ो बेकार की बातों में कहीं बीत ना जाए रैना
कुछ तो लोग कहेंगे ...

हमको जो आने देते हैं, हमको यह इन रंगरलियों में - २
हमने उनको भी छुप छुपके, आते देखा इन गलियों में
ये सच है झूठी बात नहीं, तुम बोलो ये सच है ना
कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना
छोड़ो बेकार की बातों में कहीं बीत ना जाए रैना
कुछ तो लोग कहेंगे ...

गीत: आँदी है जाँदी है । Aandhi Hai Jaadhi Hai
चित्रपट: श्याम घनश्याम, Sham Ghansham (1998)
संगीत: विशाल भारद्वाज । Vishal Bhardwaj
गीतकार: आनंद बक्षी । Anand Bakshi
स्वर: हेमा सरदेसाई और सुखविंदर सिंह । Hema Sardesai & Sukhvinder
कलाकार: प्रिया गिल, चंद्रचूर्ण सिंह, अरबाज़ ख़ान । Priya Gill, Chandrachur Singh & Arbaaz Khan

गीत के बोल:



गीत के बोल:
आँदी है जाँदी है, आँदी जाँदी है
अँखियाँ मटकाँदी है कोठे पे बुलाँदी है
सोये न सोने दे सारी रात जगाँदी है

अँखियाँ मटकाँदी, हाँ अम्मा
कोठे पे बुलाँदी, हाँ अम्मा
तुझको सताती, हाँ अम्मा

आँदा है जाँदा है, आँदा जाँदा है
अखियाँ मटकाँदा है कोठे पे बुलाँदा है
सोये न सोने दे सारी रात जगाँदा है

अखियाँ मटकाँता, हाँ बाबा
कोठे पे बुलाँता, हाँ बाबा
तुझको सताता, हाँ बाबा

हाए मुझको प्यार भरी चिट्ठियाँ लिखता है
लिखता है दिल ले ले ये मुफ़्त में बिकता है
एक दिल बोले मैं हाँ कर दूँ
एक दिल बोले मैं न कर दूँ
ओ मुंडे की अम्मा तेरा मुंडा सताँदा है

आँदी है जाँदी है, आँदी जाँदी है

आधा घूँघट खोल के वो दिल तरसाती है
न छुपती है न खुलकर सामने आती है
कभी लटका दे कभी झटका दे
मुझे रस्ते से न भटका दे
ओ लड़की के बापू तेरी कुड़ी सताँदी है

आदाँ ऐ जाँदा है, आदाँ जाँदा है
अखियाँ मटकाँदा है कोठे पे बुलाँदा है
सोये न सोने दे सारी रात जगाँदा है

आँदा जाँदा मुझे सताँदा मुझे पटाँदा है
आँदी जाँदी मुझे सताँदी मुझे सताँदी है

आज जो गीत आप सुनेंगे वह फ़िल्म नसीब से है, यह स्वर साम्राज्ञी लता मंगेश्कर द्वारा गाया गया एक अकेला डिस्को (Disco) गीत है। आइए इसका लुत्फ़ उठाएँ।



गीतकार : आनंद बक्षी | Anand Bakshi
गायक : लता मंगेशकर | Lata Manageshkar
संगीतकार : लक्ष्मीकांत प्यारेलाल | Laxmikant Pyarelal
चित्रपट : नसीब (1981) | Naseeb
कलाकार : हेमा मालिनी । Hema Malini

गीत के बोल :

मेरे नसीब में तो है कि नहीं +
तेरे नसीब में मैं हूँ कि नहीं (x2)
यह हम क्या जाने, यह वही जाने,
जिसने लिखा है सब का नसीब...

मेरे नसीब में तो है कि नहीं +
तेरे नसीब में मैं हूँ कि नहीं (x2)

इक दिन ख्वाब में वो मुझे मिल गया(x2)
देखकर जो मुझे फूल सा खिल गया
शरमा गयी मैं हय-हय, घबरा गयी मैं हय-हय(x2)
शरमा गयी मैं, घबरा गयी मैं
कहने लगा वो आकर क़रीब

मेरे नसीब में तो है कि नहीं +
तेरे नसीब में मैं हूँ कि नहीं (x2)

बात यह ख़्वाब की सच मगर हो गयी(x2)
नौजवान मैं तुझे देखकर हो गयी
आँखें मिलीं हैं हय-हय, दिल भी मिले हय-हय(x2)
आँखें मिलीं हैं दिल भी मिले हैं
देखे मिलें कब अपने नसीब

मेरे नसीब में तो है कि नहीं +
तेरे नसीब में मैं हूँ कि नहीं (x2)

हम कहीं फिर मिलें, इक हसीं रात में(x2)
बात यह आ गयी, फिर किसी बात में
अब के हुआ यह हय-हय, मैंने कहा यह हय-हय(x2)
अब के हुआ यह, मैंने कहा यह
मुझको बता दे मेरे हबीब

मेरे नसीब में तो है कि नहीं +
तेरे नसीब में मैं हूँ कि नहीं (x2)
यह हम क्या जाने, यह वही जाने,
जिसने लिखा है सब का नसीब

मेरे नसीब में तो है कि नहीं +
तेरे नसीब में मैं हूँ कि नहीं (x4)
7

साल का आख़िरी दिन और एक प्रेम गीत से उसका समापन करना चाहूँगा! आप सभी पिछ्ली सभी कड़वी बातें भूलकर फिर से प्रेम और सौहाद्र की बोली बोलिए। यह गीत मुझे बहुत पसंद रहा और अपने समय के सबसे बड़े हिट गीतों में से एक है।



गीत: एक-दूजे के लिए | Ek Duuje Ke Liye
फ़िल्म: एक-दूजे के लिए (1981) | Ek Duuje Ke Liye
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल | Laxmikant Pyarelal
कलाकार: रति अग्निहोत्री, कमल हसन । Rati Agnihotri, Kamal Hassan
स्वर: लता मंगेश्कर, एस. पी. बालासुब्रामण्यम | Lata Mangeshkar, SP Balasubrahmanyam

गीत के बोल
लता:
हम बने तुम बने एक दूजे के लिये
उसको क़सम लगे जो बिछड़ के इक पल भी जिये

एस. पी. बालासुब्रामण्यम:
I don't know what you say - २

लता:
तुम हो बुद्धू जान लो
you are handsome मान लो
सब बातों को छोड़ के आँखों को पहचान लो
आँखों ने आँखों से वादे यही किये
उस को क़सम लगे ...

एस. पी. बालासुब्रामण्यम:
I don't know what you say - २
but I want to dance and play- २
I want to paly the game of love
I want you in the name of love

लता:
you come here

एस. पी. बालासुब्रामण्यम:
Don't here up in the sky
come with me I want to fly
don't stop let the whole world know
come fast - २
don't be slow
Life is fire life is snow

लता:
इश्क़ पर ज़ोर नहीं ग़ालिब ने कहा है इसीलिये
उस को क़सम लगे ...

एस. पी. बालासुब्रामण्यम:
I don't know what you say - २

लता:
We are made for each other समझे
8

इसे सुनिए और रूमानी हो जायिए... यह गीत मैंने जब पहली बार देखा तो जाना कि धर्मेन्द भी रोमान्टिक हीरो हैं। आशा है कि धर्मेन्द्र के लिए आनन्द बक्षी द्वारा लिखा गया यह रूमानी गीत आपका दिल जीत लेगा!



Ishq par zor nahi 1970

गीत: दिल तो दीवाना है | Dil to diwana hai
फ़िल्म: इश्क़ पर ज़ोर नहीं (1970) | Ishq par zor nahi
संगीतकार: एस. डी. बर्मन | Sachin Dev Burman
गायक: मो० रफ़ी, लता मंगेश्कर | Mohammad Rafi, Lata Mangeshkar

लता दी: ये दिल दीवाना है, दिल तो दीवाना है
दीवाना दिल है ये दिल दीवाना
आ हा हा
मो० रफ़ी: आ हा हा
ये दिल दीवाना है, दिल तो दीवाना है
दीवाना दिल है ये दिल दीवाना
दोनों: आ हा हा

लता दी: कैसा बेदर्दी है
कैसा बेदर्दी है, इसकी तो मर्ज़ी है
जब तक जवानी है, ये रुत सुहानी है
नज़रें जुदा ना हों, अरमां ख़फ़ा ना हों
दिलकश बहारों में, छुपके चनारों में
यूं ही सदा हम तुम, बैठे रहें गुमसुम
वो बेवफ़ा जो कहे हमको जाना है
ये दिल
ये दिल दीवाना है, दिल तो दीवाना है
दीवाना दिल है ये दिल दीवाना
दोनों: आ हा हा

मो० रफ़ी: बेचैन रहता है
बेचैन रहता है, चुपके से कहता है
मुझको धड़कने दो, शोला भड़कने दो
काँटों में कलियों में, साजन की गलियों में
फेरा लगाने दो, छोड़ो भी जाने दो
खो तो न जाऊंगा, मैं लौट आऊंगा
देखा सुने समझे अच्छा बहाना है
ये दिल
ये दिल दीवाना है, दिल तो दीवाना है
दीवाना दिल है ये दिल दीवाना
दोनों: आ हा हा

लता दी: सावन के आते ही
सावन के आते ही
मो० रफ़ी: बादल के छाते ही
लता दी: फूलों के मौसम में
मो० रफ़ी: फूलों के मौसम में
दोनों: चलते ही पुरवाई, मिलते ही तन्हाई
उलझा के बातों में, कहता है रातों में
मो० रफ़ी: यादों में खो जाऊं, जल्दी से सो जाऊं
लता दी: क्योंके साँवरिया को सपनों में आना है
ये दिल
मो० रफ़ी: ये दिल
लता दी: ये दिल दीवाना है
मो० रफ़ी: दिल तो दीवाना है
दोनों: दीवाना दिल है ये दिल दीवाना
आ हा हा -२

----

Lata Di: ye dil diivaanaa hai, dil to diivaanaa hai
diivaanaa dil hai ye dil diivaanaa
aa haa haa
Md Rafi: aa haa haa
ye dil diivaanaa hai, dil to diivaanaa hai
diivaanaa dil hai ye dil diivaanaa
Chorus: aa haa haa

Lata Di: kaisaa bedardii hai
kaisaa bedardii hai, isakii to marzii hai
jab tak javaanii hai, ye rut suhaanii hai
nazare.n judaa naa ho.n, aramaa.n Kafaa naa ho.n
dilakash bahaaro.n me.n, chhupake chanaaro.n me.n
yuu.n hii sadaa ham tum, baiThe rahe.n gumasum
vo bevafaa jo kahe hamako jaanaa hai
ye dil
ye dil diivaanaa hai, dil to diivaanaa hai
diivaanaa dil hai ye dil diivaanaa
Chorus: aa haa haa

Md Rafi: bechain rahataa hai
bechain rahataa hai, chupake se kahataa hai
mujhako dha.Dakane do, sholaa bha.Dakane do
kaa.NTo.n me.n kaliyo.n me.n, saajan kii galiyo.n me.n
pheraa lagaane do, chho.Do bhii jaane do
kho to na jaauu.ngaa, mai.n lauT aauu.ngaa
dekhaa sune samajhe achchhaa bahaanaa hai
ye dil
ye dil diivaanaa hai, dil to diivaanaa hai
diivaanaa dil hai ye dil diivaanaa
Chorus: aa haa haa

Lata Di: saavan ke aate hii
saavan ke aate hii
Md Rafi: baadal ke chhaate hii
Lata Di: phuulo.n ke mausam me.n
Md Rafi: phuulo.n ke mausam me.n
Chorus: chalate hii puravaaii, milate hii tanhaaii
ulajhaa ke baato.n me.n, kahataa hai raato.n me.n
Md Rafi: yaado.n me.n kho jaauu.n, jal_dii se so jaauu.n
Lata Di: kyo.nke saa.Nvariyaa ko sapano.n me.n aanaa hai
ye dil
Md Rafi: ye dil
Lata Di: ye dil diivaanaa hai
Md Rafi: dil to diivaanaa hai
Chorus: diivaanaa dil hai ye dil diivaanaa
aa haa haa -2
7

आज साल का पहला दिन है तो आइए साल के शुरुआत इस सुन्दर गीत से करते हैं और अपनी दोस्ती बनी रहे ऐसी दुआ करते हैं। आनन्द साहब के सिवा ऐसा ख़ूबसूरत गीत और कोई दूसरा कोई नहीं लिख सकता था, उन्हें ही पता था सरल शब्द किस तरह ख़ुश्बू देते हैं।

गीत: दिये जलते हैं फूल खिलते हैं... | Diye Jalte Hain Phool Khilte Hain
फ़िल्म: नमक हराम (1973) | Namak Haraam
संगीतकार: राहुल देव बर्मन | RD Burman
स्वर: किशोर कुमार | Kishor Kumar

Namak Haram 1973



गीत के बोल:
दिये जलते हैं, फूल खिलते हैं
बड़ी मुश्किल से मगर, दुनिया में लोग मिलते हैं

जब जिस वक़्त किसी का, यार जुदा होता हैं
कुछ ना पूछो यारों दिल का, हाल बुरा होता है
दिल पे यादों के जैसे, तीर चलते हैं
दिये ...

दौलत और जवानी, एक दिन खो जाती है,
सच कहता हूँ, सारी दुनिया
दुश्मन बन जाती है
उम्र भर दोस्त लेकिन, साथ चलते हैं
दिये ...

इस रँग-धूप पे देखो, हरगिज नाज़ ना करना,
जान भी माँगे, यार तो दे देना, नाराज़ ना करना
रँग उड़ जाते हैं, धूप ढलते हैं
दिये ...
4

गीत: मैं शायर बदनाम | Main Shayar Badnaam
चित्रपट: नमक हराम । Namak Haram (1973)
संगीत: राहुल देव बर्मन । R.D. Burman
गीतकार: आनंद बक्षी । Anand Bakshi
स्वर: किशोर कुमार । Kishor Kumar

 Main Shayar Badnaam Namak Haram



गीत के बोल:


मैं शायर बदनाम, हो मैं चला, मैं चला
महफ़िल से नाकाम, हो मैं चला, मैं चला
मैं शायर बदनाम...

मेरे घर से तुमको, कुछ सामान मिलेगा
दीवाने शायर का, एक दीवान मिलेगा
और इक चीज़ मिलेगी, टूटा खाली जाम
हो मैं चला, मैं चला
मैं शायर बदनाम...

शोलों पे चलना था, काँटों पे सोना था
और अभी जी भरके, किस्मत पे रोना था
जाने ऐसे कितने, बाकी छोड़के काम
हो मैं चला, मैं चला
मैं शायर बदनाम...

रस्ता रोक रही है, थोड़ी जान है बाकी
जाने टूटे दिल में, क्या अरमान है बाकी
जाने भी दे ऐ दिल, सबको मेरा सलाम
हो मैं चला, मैं चला
मैं शायर बदनाम...

(पिछली कड़ी से आगे...)

बक्षी साहब ने फ़िल्म मोम की 'गुड़िया(1972)' में गीत 'बाग़ों में बहार आयी' लता जी के साथ गाया था। इस पर लता जी बताती हैं कि 'मुझे याद है कि इस गीत की रिकार्डिंग से पहले आनन्द मुझसे मिलने आये और कहा कि मैं यह गीत तुम्हारे साथ गाने जा रहा हूँ 'इसकी सफलता तो सुनिश्चित है'। इसके अलावा 'शोले(1975)', 'महाचोर(1976)', 'चरस(1976)', 'विधाता(1982)' और 'जान(1996)' में भी पाश्र्व(प्लेबैक)गायक रहे। आनन्द साहब का फिल्म जगत में योगदान यहीं सीमित नहीं, 'शहंशाह(1988)', 'प्रेम प्रतिज्ञा(1989)', 'मैं खिलाड़ी तू आनाड़ी(1994)', और 'आरज़ू(1999)' में बतौर एक्शन डायरेक्टर भी काम किया, सिर्फ यही नहीं 'पिकनिक(1966)' में अदाकारी भी की।

Anand Bakshi, RD Burman and Lollobrigida

लता की दिव्या आवाज़ में सुनिए फ़िल्म अमर प्रेम का ये अमर गीत -


a
बक्षी के गीतों की महानता इस बात में है कि वह जो गीत लिखते थे वह किसी गाँव के किसान और शहर में रहने वाले किसी बुद्धिजीवी और ऊँची सोच रखने वाले व्यक्तिव को समान रूप से समझ आते हैं। वह कुछ ऐसे चुनिंदा गीतकारों में से एक हैं जिनके गीत जैसे उन्होंने लिखकर दिये वह बिना किसी फेर-बदल या नुक्ताचीनी के रिकार्ड किये गये। आनन्द साहब कहते थे फ़िल्म के गीत उसकी कथा, पटकथा और परिस्थिति पर निर्भर करते हैं। गीत किसी भी मन:स्थिति, परिवेश या उम्र के लिए हो सकता है सो कहानी चाहे 60,70 या आज के दशक की हो इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है।

उनका सबसे अधिक साथ संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के साथ रहा, ढेरों फिल्में और ढेरों सुपर हिट गीतों का ये काफिला इतना लंबा है की इस पर बात करें तो पोस्ट पे पोस्ट लग जाएँगीं. फिलहाल सुनते हैं फ़िल्म सरगम का ये दर्द भरा नग्मा -



आनन्द साहब को बड़े-बड़े पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिसमें 'आदमी मुसाफ़िर है' [अपनापन(1977)], 'तेरे मेरे बीच कैसा है यह बन्धन' [ एक दूजे के लिए(1981)], 'तुझे देखा तो यह जाना सनम' [दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे (1995)] और 'इश्क़ बिना क्या जीना यारों' [ ताल(1999)] गीतों के लिए चार बार फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार भी सम्मिलित है।

ए.आर. रहमान का संगीतबद्ध किया फ़िल्म ताल का ये गीत साबित करता है हर पीढी के संगीतकारों के साथ पैठ बिठाने में बक्षी साहब को कभी परेशानी नही हुई -



बक्षी साहब का निर्वाण 30 मार्च 2002 को मुम्बई में हुआ। फेफड़े और दिल की बीमारी को लेकर नानावती हास्पिटल में उनका इलाज काफ़ी समय चला लेकिन बचाने की कोशिश नाकामयाब रही। आनन्द बक्षी साहब आज हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी कमी सिर्फ़ हमें नहीं खलती बल्कि उन फिल्मकारों को भी खलती है जिनके लिए वह गीत लिखते रहे, आज अगर आप उनकी आने वाली फ़िल्मों के गीत सुने तो कहीं न कहीं उनमें प्यार की मासूमियत और सच्ची भावना की कमी झलकती है, या बनावटीपन है या उनके जैसा लिखने की कोशिश है। आनन्द साहब इस दुनिया से क्या रुख़्सत हुए जैसे शब्दों ने मौन धारण कर लिया, जाने यह चुप्पी कब टूटे कब कोई दूसरा उनके जैसा गीतकार जन्म ले!

उस मशहूरो-बदनाम शायर की याद में ये नग्मा भी सुनते चलें -



- मैं शायर बदनाम - हिंद युग्म

आनन्द बक्षी यह वह नाम है जिसके बिना आज तक बनी बहुत बड़ी-बड़ी म्यूज़िकल फ़िल्मों को शायद वह सफलता न मिलती जिनको बनाने वाले आज गर्व करते हैं। आनन्द साहब चंद उन नामी चित्रपट(फ़िल्म)गीतकारों में से एक हैं जिन्होंने एक के बाद एक अनेक और लगातार साल दर साल बहुचर्चित और दिल लुभाने वाले यादगार गीत लिखे, जिनको सुनने वाले आज भी गुनगुनाते हैं, गाते हैं। जो प्रेम गीत उनकी कलम से उतरे उनके बारे में जितना कहा जाये कम है, प्यार ही ऐसा शब्द है जो उनके गीतों को परिभाषित करता है और जब उन्होंने दर्द लिखा तो सुनने वालों की आँखें छलक उठीं दिल भर आया, ऐसे गीतकार थे आनन्द बक्षी। दोस्ती पर शोले फ़िल्म में लिखा वह गीत 'यह दोस्ती हम नहीं छोड़ेगे' आज तक कौन नहीं गाता-गुनगुनाता। ज़िन्दगी की तल्ख़ियों को जब शब्द में पिरोया तो हर आदमी की ज़िन्दगी किसी न किसी सिरे से उस गीत से जुड़ गयी। गीत जितने सरल हैं उतनी ही सरलता से हर दिल में उतर जाते हैं, जैसे ख़ुशबू हवा में और चंदन पानी में घुल जाता है। मैं तो यह कहूँगा प्रेम शब्द को शहद से भी मीठा अगर महसूस करना हो तो आनन्द बक्षी साहब के गीत सुनिये। मजरूह सुल्तानपुरी के साथ-साथ एक आनन्द बक्षी ही ऐसे गीतकार हैं जिन्होने 43 वर्षों तक लगातार एक के बाद एक सुन्दर और कृतिमता(बनावट)से परे मनमोहक गीत लिखे, जब तक उनके तन में साँस का एक भी टुकड़ा बाक़ी रहा।

Ashim Samanta, Anand Bakshi, RD Burman, Mithun Chakraborthy and Shakti Samanta

सुनिए सबसे पहले रफ़ी साहब की आवाज़ में ये खूबसूरत प्रेम गीत -



21 जुलाई सन् 1930 को रावलपिण्डी में जन्मे आनंद बक्षी से एक यही सपना देखा था कि बम्बई (मुम्बई) जाकर पाश्र्व(प्लेबैक) गायक बनना है। इसी सपने के पीछे दौड़ते-भागते वे बम्बई आ गये और उन्होंने अजीविका के लिए 'जलसेना (नेवी), कँराची' के लिए नौकरी की, लेकिन किसी उच्च पदाधिकारी से कहा सुनी के कारण उन्होंने वह नौकरी छोड़ दी। इसी बीच भारत-पाकिस्तान बँटवारा हुआ और वह लखनऊ में अपने घर आ गये। यहाँ वह टेलीफोन आपरेटर का काम कर तो रहे थे लेकिन गायक बनने का सपना उनकी आँखों से कोहरे की तरह छँटा नहीं और वह एक बार फिर बम्बई को निकल पड़े।

उनका यही दीवानापन था जिसे किशोर ने अपना स्वर दिया -



बम्बई जाकर अन्होंने ठोकरों के अलावा कुछ नहीं मिला, न जाने यह क्यों हो रहा था? पर कहते हैं न कि जो होता है भले के लिए होता है। फिर वह दिल्ली तो आ गये और EME नाम की एक कम्पनी में मोटर मकैनिक की नौकरी भी करने लगे, लेकिन दीवाने के दिल को चैन नहीं आया और फिर वह भाग्य आज़माने बम्बई लौट गये। इस बार बार उनकी मुलाक़ात भगवान दादा से हुई जो फिल्म 'बड़ा आदमी(1956)' के लिए गीतकार ढूँढ़ रहे थे और उन्होंने आनन्द बक्षी से कहा कि वह उनकी फिल्म के लिए गीत लिख दें, इसके लिए वह उनको रुपये भी देने को तैयार हैं। पर कहते हैं न बुरे समय की काली छाया आसानी से साथ नहीं छोड़ती सो उन्हें तब तक गीतकार के रूप में संघर्ष करना पड़ा जब तक सूरज प्रकाश की फिल्म 'मेहदी लगी मेरे हाथ(1962)' और 'जब-जब फूल खिले(1965)' पर्दे पर नहीं आयी। अब भाग्य ने उनका साथ देना शुरु कर दिया था या यूँ कहिए उनकी मेहनत रंग ला रही थी और 'परदेसियों से न अँखियाँ मिलाना' और 'यह समा है प्यार का' जैसे लाजवाब गीतों ने उन्हें बहुत लोकप्रिय बना दिया। इसके बाद फ़िल्म 'मिलन(1967)' में उन्होंने जो गीत लिखे, उसके बाद तो वह गीतकारों की श्रेणी में सबसे ऊपर आ गये। अब 'सावन का महीना', 'बोल गोरी बोल', 'राम करे ऐसा हो जाये', 'मैं तो दीवाना' और 'हम-तुम युग-युग' यह गीत देश के घर-घर में गुनगुनाये जा रहे थे। इसके आनन्द बक्षी आगे ही आगे बढ़ते गये, उन्हें फिर कभी पीछे मुड़ के देखने की ज़रूरत नहीं पड़ी।

फ़िल्म मिलन का ये दर्द भरा गीत, लता की आवाज़ में भला कौन भूल सकता है -



यह सुनहरा दौर था जब गीतकार आनन्द बक्षी ने संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के साथ काम करते हुए 'फ़र्ज़(1967)', 'दो रास्ते(1969)', 'बॉबी(1973'), 'अमर अकबर एन्थॉनी(1977)', 'इक दूजे के लिए(1981)' और राहुल देव बर्मन के साथ 'कटी पतंग(1970)', 'अमर प्रेम(1971)', हरे रामा हरे कृष्णा(1971' और 'लव स्टोरी(1981)' फ़िल्मों में अमर गीत दिये। फ़िल्म अमर प्रेम(1971) के 'बड़ा नटखट है किशन कन्हैया', 'कुछ तो लोग कहेंगे', 'ये क्या हुआ', और 'रैना बीती जाये' जैसे उत्कृष्ट गीत हर दिल में धड़कते हैं और सुनने वाले के दिल की सदा में बसते हैं। अगर फ़िल्म निर्माताओं के साक्षेप चर्चा की जाये तो राज कपूर के लिए 'बॉबी(1973)', 'सत्यम् शिवम् सुन्दरम्(1978)'; सुभाष घई के लिए 'कर्ज़(1980)', 'हीरो(1983)', 'कर्मा(1986)', 'राम-लखन(1989)', 'सौदागर(1991)', 'खलनायक(1993)', 'ताल(1999)' और 'यादें(2001)'; और यश चोपड़ा के लिए 'चाँदनी(1989)', 'लम्हे(1991)', 'डर(1993)', 'दिल तो पागल है(1997)'; आदित्य चोपड़ा के लिए 'दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे(1995)', 'मोहब्बतें(2000)' फिल्मों में सदाबहार गीत लिखे। बख्शी साहब पर और बातें करेंगें इस लेख के अगले अंक में तब तक फ़िल्म महबूबा का ये अमर गीत सुनें, और याद करें उस गीतकार को जिसने आम आदमी की सरल जुबान में फिल्मी किरदारों को जज़्बात दिए.



- जिसके गीतों ने आम आदमी को अभिव्यक्ति दी - आनंद बख्शी | आवाज़
6



ग़म का दिल पर घाव बहुत गहरा होता है, ख़ुशी तो कोई भूल भी जाये मगर ग़म के अंधेरे कोई नहीं भूल पाया, ऐसा ही इस गीत में आनंद साहब ने लिखा है, मैं तो रोता हूँ साथ सावन भी रोता है! और यही सच है।



गीत: लगी आज सावन की फिर वह झड़ी है / Lagi aaj sawan ki phir wo jhari hai
गीतकार: आनन्द बक्षी / Anand Bakshi
फ़िल्म: चाँदनी १९८९ / Chandni 1989
संगीत: शिव-हरि / Shiv-Hari
स्वर: सुरेश वाडेकर / Suresh Wadekar

गीत के बोल:

लगी आज सावन की फिर वह झड़ी है-2
वही आग सीने में फिर जल पड़ी है,
लगी आज सावन की फिर वह झड़ी है...

कुछ ऐसे ही दिन थे वह जब हम मिले थे
चमन में नहीं फूल दिल में खिले थे,
वही तो है मौसम मगर रुत नहीं वह
मेरे साथ बरसात भी रो पड़ी है,
लगी आज सावन की फिर वह झड़ी है-2

कोई काश दिल पे ज़रा हाथ रख दे
मेरे दिल के टुकड़ों को इक साथ रख दे,
मगर यह है ख्वाबों ख़्यालों की बातें
कभी टूटकर चीज़ कोई जुड़ी है,
लगी आज सावन की फिर वह झड़ी है-2
6

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