कुछ तो लोग कहेंगे - अमर प्रेम (१९७१)

संसार की बातों को दिल से नहीं लगाना चाहिए और जो उचित है वही करना चाहिए यह सभी विद्वानों ने माना है क्योंकि यह सार्थक है। लेकिन जब बम्बई जगत में बनी किसी फ़िल्म में यह बात गीत के रूप में कही जा रही हो तो आनन्द बख्शी के इस गीत से बेहतर कोई दूसरा गीत मैंने नहीं पाया, आप भी सोचकर देंखे, नहीं पायेंगे! ऐसा गीत तो कोई लिख ही सकता आनन्द साहब ने जो लिखा किशोर दा ने उसे ख़ूब गाया, इस गीत का लुत्फ़ लें मैं कोई दूसरा नग़मा ढूँढ़ता हूँ...


स्वर: किशोर कुमार | Kishor Kumar
गीतकार: आनन्द बक्षी । Anand Bakshi
फ़िल्म: अमर प्रेम (1971) | Amar Prem
संगीत: आर. डी. बर्मन | R.D. Burman
कलाकार: राजेश खन्ना । Rajesh Khanna



गीत के बोल:

(कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना
छोड़ो बेकार की बातों में कहीं बीत ना जाए रैना ) - २
कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना

कुछ रीत जगत की ऐसी है, हर एक सुबह की शाम हुई - २
तू कौन है, तेरा नाम है क्या, सीता भी यहाँ बदनाम हुई
फिर क्यूँ संसार की बातों से, भीग गये तेरे नैना
कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना
छोड़ो बेकार की बातों में कहीं बीत ना जाए रैना
कुछ तो लोग कहेंगे ...

हमको जो आने देते हैं, हमको यह इन रंगरलियों में - २
हमने उनको भी छुप छुपके, आते देखा इन गलियों में
ये सच है झूठी बात नहीं, तुम बोलो ये सच है ना
कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना
छोड़ो बेकार की बातों में कहीं बीत ना जाए रैना
कुछ तो लोग कहेंगे ...

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बहुत सुंदर गीत, हमे हमारा जमाना याद दिला रहे है आप.
धन्यवाद

शुक्रिया साहब, अभी और भी ख़ूबसूरत गीत बाक़ी हैं,

धन्यवाद!

Bouth he aacha post nice blog good going

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sarrahneey prayas .baksi saheb ke 'dil to paagal hai' ke gaane bhi kamaal the

NAGAMA DHUDHNA HAI..........."AAP YOO PHASLO SE GUJARATE RAHE........." AB DHUDHIYE

शुक्रिया स्वप्निल और सादिक साहब

ये गीत अपने धुन के साथ अपने सार गर्भित अर्थ वाले बोलों के कारण भी मेरे दिल के के नज़दीक रहा है.

धन्यवाद सुनाने क्के लिये..

साहब यही बात तो है आनन्द साहब की लेखनी में, वह हल्की लगने वाली मगर गंभीर बातें लिखते थे! यह तो अपनी-अपनी समझ की बात है, धन्यवाद!

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