यह खिड़की जो बंद रहती है - मैं तुलसी तेरे आँगन की (१९७८)

बहुत सरल-सा गीत है जिसे मो. रफ़ी ने गाया है जो किसी को एहसास दिलाता है कि प्यार की मुश्किलें सब आसान हो जायेंगी और आपकी प्रेमिका जो छुपने का झूठा नाटक कर रही है उसे आपके प्रेम की ख़ातिर वह ख़त्म ही करना पड़ेगा। बहुत कर्णप्रिय गीत-संगीत है आप भी सुनिए!



स्वर: मोहम्मद रफ़ी । Mohd. Rafi
गीतकार: आनन्द बक्षी | Anand Bakshi
फ़िल्म: मैं तुलसी तेरे आँगन की (1978) | Main Tulsi Tere Angan Ki (1978)
संगीत: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल | Laxmikant-Pyarelal

गीत के बोल:

मेरी दुश्मन है ये मेरी उलझन है ये
बड़ा तड़पाती है दिल को तरसाती है
ये खिड़की
ये खिड़की
जो बन्द रहती है
जो बन्द रहती है
मेरी दुश्मन है ये …

लगता है मेला न जाने कहाँ
आशिक़ जमा होते हैं जहाँ
अरे सबको पता है ये दास्ताँ
इस घर में है एक लड़की जवाँ
आँखें झुका के गुज़रो इस गली से
आने-जाने वालों से कहती है
ये खिड़की जो बन्द …

ग़म की घटा है ये छट जाएगी
आहों से दीवार फट जाएगी
जब सामने से ये हट जाएगी
घूँघट में गोरी सिमट जाएगी
इक रोज़ गिर जाएगी टूट के ये
कितने नज़रों के तीर सहती है
ये खिड़की जो बन्द …

आए कभी चौबारे पे वो
कुछ सोचे मेरे बारे में वो
अरे बातें करे दो इशारे में वो
चुप सी खड़ी है उस किनारे पे वो
उस पार वो है और इस पार मैं हूँ
नदिया बीच में बहती है
ये खिड़की जो बन्द …

Roman Hindi Lyrics -
Meri dushman hai yeh meri uljhan hai yeh
Bada tadapati hai dil tarsati hai yeh khidki
Khidki yeh khidki, yeh khidki jo bandh raheti hai
Yeh khidki jo bandh raheti hai

Meri dushman hai yeh meri uljhan hai yeh
Bada tadapati hai dil tarsati hai yeh khidki
Khidki yeh khidki, yeh khidki jo bandh raheti hai
Yeh khidki jo bandh raheti hai

Lagta hai mela na jaane kahan
Ashiq jama hotey hai yahan
Arey sabko pata hai yeh dastaan
Is ghar me hai ek ladki jawan
Ankhen jhuka ke guzro is gali se
Aane jaanewalon se kaheti hai
Yeh khidki jo bandh raheti hai
Yeh khidki jo bandh raheti hai

Gham ki ghata hai ye chhat jayengi
Baaho se deewar pahat jayengi
Jab samne se ye hat jayengi
Ghunghat main gori simat jayengi
Ik roj khul jayengi tut ke ye kitani
Nazro ke tir sehati hai
Yeh khidki jo bandh raheti hai
Yeh khidki jo bandh raheti hai

Aaye kabhi chaubharey main woh
Kuch sochey mere bharey main owh
Arey baaten karen jo ishare me woh
Baithi kadi chaubarey main woh
Us paar woh hai aur is paar main
Nadiya beech main baheti hai
Yeh khidki jo bandh raheti hai.

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क्या बात है बहुत बढ़िया गीत है ये खिड़की जो बंद रहती है. श्रद्धांजलि

बहुत ही सुन्दर गीत है जिसे रफ़ी की आवाज़ ने ताज़गी दी है।

-मृदुल

इस सुन्दर गीत पर टिप्पणी करने के लिए आप सभी का आभार

धन्यवाद सुंदर गीत के लिये

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