चिंगारी कोई भड़के - अमर प्रेम (१९७१)

फ़िल्म अमर प्रेम से यह मनोरम गीत किसे याद नहीं आइए इसका लुत्फ़ उठायें। आनन्द और राहुल का यह बेहतरीन गीत आपके दिल में एक बार फिर उतर जायेगा।



गीत : चिंगारी कोई भड़के । Chingari Koi Bhadake
गायक : किशोर कुमार | Kishor Kumar
संगीतकार : राहुलदेव बर्मन | R D Burman
चित्रपट : अमर प्रेम (१९७१) | Amar Prem (1971)
गीतकार : आनंद बक्षी | Anand Bakshi
प्रस्तुति: राजश्री प्रोडक्शन । Rajshree Production

Amar Prem 1971


गीत के बोल:

आनंद बाबू : रो मत पुष्पा, आज तुम जो हो जिस जगह हो,
तुम्हारे आँख के पानी saline water, I mean नमकीन
पानी के अलावा कुछ नहीं है. इसलिये इन्हें पोंछ डालो
पुष्पा, I hate tears.

पुष्पा : हाँ आनंद बाबू आप ठीक कहते हैं। बैठिये।

आनंद बाबू : छोड़ो पुष्पा, चलो आज कहीं बाहर चलते हैं।
ढूँढें कोई ऐसी जगह जहाँ थोड़ी देर के लिये ही
सही कुछ याद न आये, न तुम्हें न मुझे।

चिंगारी कोई भड़के, तो सावन उसे बुझाये
सावन जो अगन लगाये, उसे कौन बुझाये,
ओ... उसे कौन बुझाये

पतझड़ जो बाग़ उजाड़े, वो बाग़ बहार खिलाये
जो बाग़ बहार में उजड़े, उसे कौन खिलाये
ओ... उसे कौन खिलाये

हमसे मत पूछो कैसे, मंदिर टूटा सपनों का - (२)
लोगों की बात नहीं है, ये क़िस्सा है अपनों का
कोई दुश्मन ठेस लगाये, तो मीत जिया बहलाये
मन मीत जो घाव लगाये, उसे कौन मिटाये

न जाने क्या हो जाता, जाने हम क्या कर जाते - (२)
पीते हैं तो ज़िन्दा हैं, न पीते तो मर जाते
दुनिया जो प्यासा रखे, तो मदिरा प्यास बुझाये
मदिरा जो प्यास लगाये, उसे कौन बुझाये
ओ... उसे कौन बुझाये

माना तूफ़ाँ के आगे, नहीं चलता ज़ोर किसी का - (२)
मौजों का दोष नहीं है, ये दोष है और किसी का
मझधार में नैय्या डोले, तो माझी पार लगाये
माझी जो नाव डुबोये, उसे कौन बचाये
ओ... उसे कौन बचाये

चिंगारी ...

7 comments:

  1. हम से मत पुछो कैसे मन्दिर टुटा सपनों का, गैरों की बात नही ये किस्सा है अपनों का .........वाह बेहतरीन
    regards

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  2. शुक्रिया, सीमा जी!

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  3. मेरा बहुत पसंदीदा गीत है। शुक्रिया!

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  4. शुक्रिया, दिनेश जी!

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  5. विनय जी, बहुत ही बेहतरीन प्रस्तुति के लिये साधुवाद

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  6. मौदगिल साहब धन्यवाद!

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  7. बहुत सुन्दर गीत सुनवाया है, मुझे बहुत पसंद है

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