और क्या अहदे-वफ़ा होते हैं - सनी (१९८४)

यह गीत जब भी सुनता हूँ इसका असर रूह तक होता है। ग़ुम हो जाता हूँ बीते हुए पलों में और इसका लुत्फ़ धीरे-धीरे मुझे जज़्ब कर लेता है। जैसे आनन्द साहब ने इस गीत के शब्दों को दर्द का सानी बना दिया है। सुनिए और अपनी यादों में सराबोर हो जाइए।

गीत: और क्या अहदे-वफ़ा होते हैं । Aur kya Ehd-e-wafa hote hain
स्वर: आशा भोंसले | Asha Bhosle
गीतकार: आनन्द बक्षी | Anand Bakshi
फ़िल्म: सनी (1984) | Sunny
संगीत: राहुल देव बर्मन | RD Burman

Part 1



Part 2



गीत के बोल:
और क्या अहदे-वफा होते हैं
लोग मिलते हैं जुदा होते हैं

मोहब्बत करने वाले कम नहीं हैं
तेरी महफ़िल में मगर हम नहीं हैं

कब बिछड़ जाये हमसफर ही तो है
कब बदल जाये इक नज़र ही तो है
जानो-दिल जिस पे फ़िदा होते हैं
और क्या अहदे-वफ़ा होते हैं...

हम तो दो बोल कह के हारे हैं
तुम हमारे हम तुम्हारे हैं

बात निकली थी इस ज़माने की
जिसको आदत है भूल जाने की
आप क्यों हमसे खफ़ा होते हैं
और क्या अहदे वफ़ा होते हैं...

जब रुला लेते हैं जी भर के हमें
जब सता लेते हैं जी भर के हमें
तब कहीं खुश वो ज़रा होते हैं
और क्या अहदे-वफ़ा होते हैं...

5 comments:

  1. जब सता लेते हैं जी भर के हमे....जब रुला लेते हैं ....इस गाने की वजह से ये फ़िल्म कई बार देखी थी.....बहुत अच्छा लगा आज फ़िर सुन कर..."

    Regards

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  2. बहुत बहुत धन्यवाद मेरी पंसद का गीत सुनाने के लिये

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  3. धन्यवाद, आगे भी ऐसे सुन्दर नग़मे पेश करता रहूँगा!

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  4. मेरा बहुत ही पंसदीदा गीत है

    -- राजीव

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