दिये जलते हैं फूल खिलते हैं - नमक हराम (१९७३)

आज साल का पहला दिन है तो आइए साल के शुरुआत इस सुन्दर गीत से करते हैं और अपनी दोस्ती बनी रहे ऐसी दुआ करते हैं। आनन्द साहब के सिवा ऐसा ख़ूबसूरत गीत और कोई दूसरा कोई नहीं लिख सकता था, उन्हें ही पता था सरल शब्द किस तरह ख़ुश्बू देते हैं।

गीत: दिये जलते हैं फूल खिलते हैं... | Diye Jalte Hain Phool Khilte Hain
फ़िल्म: नमक हराम (1973) | Namak Haraam
संगीतकार: राहुल देव बर्मन | RD Burman
स्वर: किशोर कुमार | Kishor Kumar

Namak Haram 1973



गीत के बोल:
दिये जलते हैं, फूल खिलते हैं
बड़ी मुश्किल से मगर, दुनिया में लोग मिलते हैं

जब जिस वक़्त किसी का, यार जुदा होता हैं
कुछ ना पूछो यारों दिल का, हाल बुरा होता है
दिल पे यादों के जैसे, तीर चलते हैं
दिये ...

दौलत और जवानी, एक दिन खो जाती है,
सच कहता हूँ, सारी दुनिया
दुश्मन बन जाती है
उम्र भर दोस्त लेकिन, साथ चलते हैं
दिये ...

इस रँग-धूप पे देखो, हरगिज नाज़ ना करना,
जान भी माँगे, यार तो दे देना, नाराज़ ना करना
रँग उड़ जाते हैं, धूप ढलते हैं
दिये ...

4 comments:

  1. बहुत सुंदर गीत सुनाया आप ने .
    धन्यवाद

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  2. शुक्रिया! सभी इस गीत को सुनने वालों को!

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  3. कितनी मीठा गाना सुनाया आपने
    धन्यवाद

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