गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है - दोस्त (१९७४)

वाह क्या गीत है, 'गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है'!!! ज़िन्दगी में सदा आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाले इस गीत में आनन्द साहब ने रेल का उदाहरण लेकर ख़ूब कमाल कर दिखाया है! किशोर दा ने भी इतनी ख़ूबसूरती से गाया है इसे बार-बार सुनने को दिल करता है! लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जो इंडस्ट्री में हिट गीतों देने वाली मशीन माने जाते रहे हैं, उनका बुना यह एक नायाब गीत है। सुनिए और बताइए यह आपको कैसा लगा?

यह गीत फ़िल्म में दो भागों में है इसलिए पहला और दूसरा दोनों दे रहा हूँ, गीत कुछ बड़ा है इसलिए इसका आडियो रूप भी दे रहा हूँ, अपने श्रोताओं का ख़्याल तो रखना ही पड़ता है!

गीत का पहला भाग:



गीत का दूसरा भाग:




गीत: गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है | Gaadi bula rehi hai, ceeti baza rahi hai
स्वर: किशोर कुमार | Kishor Kumar
गीतकार: आनन्द बक्षी | Anand Bakshi
फ़िल्म: दोस्त (1974) | Dost
संगीत: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल | Laxmikant Pyarelal
कलाकार: धर्मेंद्र । Dharmendra


गीत के बोल:
गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है...
चलना ही ज़िंदगी है, चलती ही जा रही है

देखो वह रेल, बच्चों का खेल, सीखो सबक जवानों
सर पे है बोझ, सीने में आग, लब पे धुँआ है जानो
फिर भी ये गा रही है, नग़में सुना रही है...

आगे तूफ़ान, पीछे बरसात, ऊपर गगन पे बिजली
सोचे न बात, दिन हो के रात, सिगनल हुआ के निकली
देखो वो आ रही है, देखो वो जा रही है

आते हैं लोग, जाते हैं लोग, पानी के जैसे रेले
जाने के बाद, आते हैं याद, गुज़रे हुए वो मेले
यादें मिटा रही है, यादें बना रही है

गाड़ी को देख, कैसी है नेक, अच्छा बुरा न देखे
सब हैं सवार, दुश्मन के यार, सबको चली ये लेके
जीना सिखा रही है, मरना सिखा रही है

गाड़ी का नाम, ना कर बदनाम, पटरी पे रख के सर को
हिम्मत न हार, कर इंतज़ार, आ लौट जाएं घर को
ये रात जा रही है, वो सुबह आ रही है

सुन ये पैग़ाम, ये है संग्राम, जीवन नहीं है सपना
दरिया को फाँद, पर्वत को चीर, काम है ये उसका अपना
नींदें उड़ा रही है, जागो जगा रही है

Post a Comment

सही में ज़िन्दगी की रेलगाडी ही तो है. सुंदर गीत है. आभार.

बचपन मे जब हमारे घर के सामने से ट्रेन गुजरती थी तो हम लोग इस गीत को जोर-जोर से गाते थे । :)

इस गीत मे भी जिंदगी के लिए सीख है ।

जानकारी देनें व गीत सुनवाने के लिए आभार।

@ परमजीत जी, आपको गीत पसंद आया इसके लिए आभार!

its my very fav right from my childhood thanks vinay 4 sharing- sajeev sarathie

litikesh suggest me this, save some thanks for him also! by the way thanks!

सही है....बहुत सुंदर गीत है यह।

संगीता जी प्रंशसक परिवार से जुड़ें हर्ष होगा!

अजी क्या सुंदर सुंदर गीत सुना रहे हो?? बहुत मजा आ गया.
धन्यवाद

राज भाटिया साहब यूं तो आप लगभग हर बार प्रशंसा करते हैं! लेकिन फिर भी इस ब्लॉग की प्रशंसक लिस्ट से जुड़कर कुछ और हौसला अफ़ज़ायी करें!

mera do saal ka beta har roj mujse is gaane ko sone se pahle sunta hain aur uski aankhen chamakne lagti hain phir kalpana ki duniya me khone lagta hain aur phir need ki. har raat main is geet se jude loogon ko shukriya kahti hoon.
Manorma
[email protected]

मनोरमा जी आपका और आपके बेटे का इस गीत के साथ इतना घनिष्ठ जुड़ाव के विषय में जानकर अति प्रसन्नता हुई! नियमित आइए! आनन्द साहब के लिखे और भी सुन्दर गीत सुनने को मिलेंगे! धन्यवाद!

मनोरमा जी आपका और आपके बेटे का इस गीत के साथ इतना घनिष्ठ जुड़ाव के विषय में जानकर अति प्रसन्नता हुई! नियमित आइए! आनन्द साहब के लिखे और भी सुन्दर गीत सुनने को मिलेंगे! धन्यवाद!

[disqus][blogger]

Editor

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget